मुजफ्फरपुर: जिले के कुढ़नी प्रखंड की छितरौली पंचायत में मनरेगा योजनाओं से संबंधित कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर राज्य स्तरीय जांच की प्रक्रिया शुरू हुई है। पंचायत निवासी सिंकू कुमार द्वारा दिए गए लिखित आवेदन में करीब एक करोड़ रुपये की कथित अनियमितता का आरोप लगाया गया है। आवेदन के आधार पर मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय राज्य स्तरीय टीम गठित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जांच टीम 9 और 10 सितंबर को छितरौली पंचायत पहुंचकर मनरेगा से जुड़ी योजनाओं का स्थल निरीक्षण करेगी। इस दौरान योजनाओं के स्वीकृत विवरण, अभिलेखों में दर्ज कार्य, स्थल पर मौजूद वास्तविक स्थिति तथा भुगतान एवं निकासी से संबंधित दस्तावेजों का मिलान किए जाने की संभावना है।

क्या है शिकायत?
आवेदनकर्ता सिंकू कुमार का आरोप है कि पंचायत में मनरेगा के तहत कई योजनाओं के नाम पर राशि की निकासी की गई, जबकि कुछ कार्य या तो धरातल पर दिखाई नहीं देते अथवा अभिलेखों में दर्ज विवरण और वास्तविक स्थिति में अंतर है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है।
हालांकि, करीब एक करोड़ रुपये की कथित अनियमितता के आरोपों की स्वतंत्र एवं अंतिम पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसकी वास्तविकता जांच के बाद सामने आएगी।

अभिलेखों और स्थल की होगी जांच
राज्य स्तरीय जांच टीम द्वारा मनरेगा योजनाओं से संबंधित सरकारी रिकॉर्ड की जांच के साथ-साथ संबंधित कार्यस्थलों का भौतिक सत्यापन किया जा सकता है। योजनाओं की स्वीकृति, कार्य की प्रकृति, मजदूरी एवं सामग्री मद में हुए भुगतान और अभिलेखों में दर्ज प्रगति की वास्तविक स्थिति का मिलान जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर
मामले में अब जांच टीम की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। यदि जांच में शिकायत में लगाए गए आरोप प्रमाणित होते हैं तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय करने और सरकारी राशि से संबंधित कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। वहीं, यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो जांच रिपोर्ट से स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।
फिलहाल किसी व्यक्ति या अधिकारी को केवल शिकायत अथवा आरोप के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता। मामले की अंतिम स्थिति जांच रिपोर्ट और सक्षम प्राधिकारी के निष्कर्ष के बाद ही स्पष्ट होगी।
छितरौली पंचायत में 9 और 10 सितंबर को प्रस्तावित राज्य स्तरीय जांच के बाद सामने आने वाले निष्कर्ष से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि मनरेगा योजनाओं में करीब एक करोड़ रुपये की कथित अनियमितता के आरोपों में कितनी वास्तविकता है।










