मुज़फ्फरपुर: जंतर-मंतर से शुरू होकर देश के विभिन्न हिस्सों तक चर्चा में आए छात्र एवं जेन-ज़ी आंदोलन की वर्तमान स्थिति, उसके कारणों तथा आगे की दिशा को लेकर मुज़फ्फरपुर में एक महत्वपूर्ण विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम विश्वविभूति पुस्तकालय, कच्ची-पक्की, मुज़फ्फरपुर में आयोजित हुआ, जिसमें प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने युवाओं और शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार रखे।
गोष्ठी की अध्यक्षता प्रो. अवधेश कुमार ने की, जबकि विषय प्रवेश एवं संचालन भारत जोड़ो अभियान के बिहार संयोजक शाहिद कमाल ने किया। कार्यक्रम का आयोजन नागरिक समाज, मुज़फ्फरपुर, भारत जोड़ो अभियान एवं राष्ट्र सेवा दल के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
विषय प्रवेश करते हुए शाहिद कमाल ने देशभर में चल रहे जेन-ज़ी आंदोलन तथा युवाओं से जुड़े विभिन्न सवालों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज देश का युवा अपने भविष्य को लेकर बेहद चिंतित है। शिक्षा व्यवस्था की बदहाल स्थिति, प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक तथा परिणाम जारी करने में हो रही देरी जैसी घटनाओं ने युवाओं के बीच असुरक्षा और आक्रोश की स्थिति पैदा की है। उन्होंने कहा कि युवाओं के सवालों को गंभीरता से समझने और उनके समाधान के लिए लोकतांत्रिक तरीके से दबाव बनाने की आवश्यकता है।
भाकपा-माले के पूर्व जिला सचिव कृष्ण मोहन ने आंदोलन में वामपंथी दलों के युवा संगठनों, विशेष रूप से आइसा की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन को आगे बढ़ाने की रूपरेखा पर भी अपने विचार रखे।
प्रो. निजामुद्दीन रिजवी ने उच्च शिक्षा की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पहले से संचालित महाविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है, जबकि नए-नए महाविद्यालय खोलने की घोषणाएं की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि नए शिक्षण संस्थान खोलने के साथ-साथ पुराने महाविद्यालयों की व्यवस्था और शैक्षणिक गुणवत्ता को भी दुरुस्त करना जरूरी है।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनू सरकार ने कहा कि आज का युवा केवल रोजगार नहीं, बल्कि सम्मानजनक और सुरक्षित भविष्य की मांग कर रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितता, पेपर लीक, परिणाम में देरी और बढ़ती बेरोजगारी ने युवाओं के बीच गहरी निराशा पैदा की है। उन्होंने कहा कि जेन-ज़ी आंदोलन को केवल एक तात्कालिक छात्र आंदोलन के रूप में देखने के बजाय शिक्षा, रोजगार, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य से जुड़े बुनियादी सवालों के संदर्भ में समझने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि इन मुद्दों को लेकर नागरिक समाज, छात्र संगठनों, बुद्धिजीवियों तथा सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं को मिलकर व्यापक जनजागरण और लोकतांत्रिक आंदोलन खड़ा करने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।
गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे प्रो. अवधेश कुमार ने कहा कि युवाओं और शिक्षा से जुड़े सवालों पर नागरिक समाज को अपनी भूमिका निभानी होगी तथा सरकार पर आवश्यक दबाव बनाना होगा, ताकि प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था देश की आने वाली कई पीढ़ियों के भविष्य को प्रभावित करेगी।
गोष्ठी में प्रो. सुमन, मुनेश्वर सिंह बौद्ध, वासुदेव दास, आनंद पटेल, संजय प्रधान, कुमार नीरज, प्रो. लालदेव पंडित, अधिवक्ता मुकेश ठाकुर, अधिवक्ता वंदना, प्रभात कुमार, रमेश कुमार, अभय कुमार, श्री होरील राय सहित अनेक सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं तथा प्रबुद्ध नागरिकों ने अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के अंत में शाहिद कमाल ने धन्यवाद ज्ञापन किया। गोष्ठी में युवाओं की शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता तथा बेहतर भविष्य से जुड़े सवालों को व्यापक लोकतांत्रिक जनचर्चा और आंदोलन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया।
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