मुजफ्फरपुर: बिहार में अपराध और दबंगई की घटनाओं को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। लेकिन सबसे गंभीर स्थिति तब होती है, जब पीड़ित पक्ष का आरोप हो कि शिकायत, एफआईआर और सबूत होने के बावजूद भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ रही।
ताजा मामला बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के मनियारी थाना क्षेत्र के मुकसुदपुर गांव का है। यहां रहने वाली रेखा देवी, पति विश्वनाथ पासवान, ने गांव के ललन सिंह, उनके पुत्र सुभाष सिंह राजपूत और गोलू सिंह सहित अन्य लोगों पर मारपीट, जातिसूचक गालियां देने, जान से मारने की धमकी, मुकदमे में समझौते का दबाव बनाने और पुलिस कार्रवाई नहीं होने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि पूरा विवाद मनरेगा की मजदूरी को लेकर शुरू हुआ। रेखा देवी का कहना है कि वह मनरेगा के तहत चल रहे कार्य में मजदूरी करती थीं। आरोप है कि उसी कार्य की देखरेख गांव के ललन सिंह करते थे, जिनकी जिम्मेदारी मजदूरों की हाजिरी लगाना, फोटो खिंचवाना और काम से जुड़ी निगरानी करना था।
रेखा देवी के अनुसार, काम पूरा होने के करीब एक सप्ताह बाद उनकी मजदूरी सरकारी प्रक्रिया के तहत सीधे बैंक खाते में पहुंची। आरोप है कि इसके बाद ललन सिंह उनके घर पहुंचे और कहा कि उन्होंने काम दिलवाया है, इसलिए मजदूरी के पैसे वापस देने होंगे। जब रेखा देवी ने पैसे देने से इनकार किया तो दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई।
रेखा देवी का आरोप है कि इसके बाद ललन सिंह ने अपने दोनों बेटों सुभाष सिंह राजपूत और गोलू सिंह को बुला लिया। तीनों ने मिलकर उनके साथ गाली-गलौज की, जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया, बाल पकड़कर घर से बाहर सड़क तक घसीटा और उनके साथ मारपीट की। आरोप है कि बीच-बचाव करने पहुंचे उनके पति विश्वनाथ पासवान के साथ भी मारपीट की गई।
परिवार का यह भी आरोप है कि उनका बेटा विक्की कुमार पूरी घटना का वीडियो बना रहा था, लेकिन आरोपियों ने उसका मोबाइल छीनकर जमीन पर पटक दिया। हालांकि, पीड़ित परिवार का दावा है कि घटना से जुड़े कुछ वीडियो साक्ष्य उनके पास सुरक्षित हैं, जिन्हें वे जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराने के लिए तैयार हैं।
घटना के बाद रेखा देवी ने मनियारी थाना में लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की। इसके बाद उन्होंने जमीन विवाद और धमकी से जुड़े अन्य मामलों में भी अलग-अलग आवेदन दिए।
दस्तावेजों के अनुसार, मनियारी थाना में इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं।
लेकिन अब पीड़ित परिवार का सबसे बड़ा आरोप पुलिस कार्रवाई को लेकर है।
रेखा देवी और उनके पति विश्वनाथ पासवान का कहना है कि एफआईआर दर्ज हुए लगभग एक वर्ष बीत चुका है, लेकिन अब तक नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई। उनका आरोप है कि आरोपी खुलेआम गांव में घूम रहे हैं और लगातार दबाव बना रहे हैं।
विश्वनाथ पासवान का आरोप है कि ललन सिंह अपनी दबंगई के बल पर हर बार पुलिस को प्रभावित कर मामला दबा देते हैं। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
पीड़ित पक्ष ने अपने एक अन्य आवेदन में यह भी आरोप लगाया है कि 2 जून 2026 को नामजद आरोपी सुभाष सिंह राजपूत ने उनके भतीजे विशाल पासवान के मोबाइल पर वीडियो कॉल कर मुकदमा वापस लेने और समझौता करने का दबाव बनाया। आरोप है कि समझौता नहीं करने पर पूरे परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने और जान-माल का नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई।
रेखा देवी का कहना है कि इस वीडियो कॉल का डिजिटल साक्ष्य भी उनके पास सुरक्षित है, जिसे वह पुलिस जांच में उपलब्ध कराने को तैयार हैं। उन्होंने पुलिस से नई प्राथमिकी दर्ज करने, आरोपियों की गिरफ्तारी, परिवार को सुरक्षा देने और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कराने की मांग की है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि एक ही परिवार लगातार शिकायतें देता रहे, गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हो, डिजिटल साक्ष्य होने का दावा करे और इसके बावजूद कार्रवाई में देरी का आरोप लगाए, तो पीड़ित का कानून पर भरोसा कैसे कायम रहेगा?
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इस रिपोर्ट में बताए गए सभी आरोप पीड़ित पक्ष द्वारा दिए गए आवेदन और उनके बयानों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले की जांच जारी है और मनियारी थाना पुलिस का विस्तृत आधिकारिक पक्ष अभी सामने आना बाकी है। जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की पुष्टि होगी।
फिलहाल, इस पूरे मामले में सभी की नजरें मुजफ्फरपुर पुलिस की आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।










