क्या बिहार में यातायात नियम सिर्फ आम लोगों के लिए हैं? क्या सड़क पर मनमानी करने वालों पर किसी का नियंत्रण नहीं है? तस्वीरें मुजफ्फरपुर के भगवानपुर से सरैया जाने वाली रेवा रोड की हैं, जहां हर दिन ट्रैफिक व्यवस्था की पोल खुलती नजर आती है।
ये कोई ऑटो स्टैंड नहीं… बल्कि भगवानपुर–सरैया रेवा रोड है। लेकिन यहां का नजारा देखकर शायद आपको भी यही लगे कि सड़क को ही ऑटो स्टैंड बना दिया गया है।
ऑटो चालक सवारी के इंतजार में घंटों तक अपने वाहन सड़क पर खड़े कर देते हैं। नतीजा—रोजाना जाम, लोगों को परेशानी और हर वक्त दुर्घटना का खतरा।
सबसे हैरानी की बात यह है कि इस सड़क पर हर दिन ट्रैफिक पुलिस के जवान भी तैनात रहते हैं। जब इस संबंध में ड्यूटी पर मौजूद एक ट्रैफिक कांस्टेबल से बात की गई तो उनका कहना था, “हम लोग सिर्फ कांस्टेबल हैं। हमारी बात कोई नहीं सुनता। प्रभावी कार्रवाई करना हमारे अधिकार में नहीं है।”
अगर ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मी ही खुद को बेबस बता रहे हैं, तो आखिर इस अव्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी है?
यही नहीं, इसी सड़क से हर रोज़ कई प्रशासनिक अधिकारियों के सरकारी वाहन भी गुजरते हैं। लेकिन इस गंभीर समस्या पर किसी का ध्यान जाता हुआ दिखाई नहीं देता।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? या फिर यातायात व्यवस्था को सुचारु रखना संबंधित विभाग के लिए चुनौती बन चुका है?
स्थानीय लोगों की मांग है कि सड़क पर अवैध रूप से वाहन खड़े करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, ऑटो के लिए अलग स्टैंड की व्यवस्था की जाए और ट्रैफिक नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए।
जब तक जिम्मेदार विभाग ठोस कदम नहीं उठाते, तब तक भगवानपुर–सरैया रेवा रोड पर जाम, अव्यवस्था और हादसों का खतरा यूं ही बना रहेगा।










